खुसूर-फुसूर कंपनी आई फिर उत्पाद क्यों नहीं आया… शहर को मिली आधुनिक उद्योग जगत की सौगात में बराबर देश की लब्ध प्रतिष्ठित कंपनियां आ रही हैं

खुसूर-फुसूर

कंपनी आई फिर उत्पाद क्यों नहीं आया…

शहर को मिली आधुनिक उद्योग जगत की सौगात में बराबर देश की लब्ध प्रतिष्ठित कंपनियां आ रही हैं। आने वाले समय में इन कंपनियों के उत्पादन की स्थिति एवं रोजगार से स्थानीय रहवासियों को लाभ मिलना भविष्य में तय है। इस बीच कुछ कंपनियां आई और अपना काम भी किया। अपने स्थापत्य की शुरूआत की और अन्यानेक कामों के बाद आकस्मिक रूप से ही धरातल से गायब हो गई हैं। उनकी प्रगति की स्थिति सामने नहीं आ पा रही है। ऐसे ही एक कंपनी एक प्रदेश एवं केन्द्र के संयुक्त उपक्रम के रूप में है। उसने भी यहां पर अपने उत्पादन को लेकर जमीन क्रय की  थी। अच्छी खासी जमीन लेकर उसकी करीब 4 कंटेनर की रजिस्ट्री भी कराई गई थी। भवन निर्माण शेड सहित कई काम कंपनी ने किए और उसके साथ ही मशीनें भी लाकर लगा दी थी। सब कुछ होने के बाद आकस्मिक रूप से अंदर के खाने में ऐसी हवा चली की कंपनी ने अपना काम ही नहीं किया और यहां से वैसे के वैसे ही धीरे से खसने का काम शुरू कर दिया। खास तो यह है कि कंपनी जिस प्रदेश से संबंद्ध रखती है वहां विपक्ष सरकार चलाता है और यहां उनके विपक्षियों की सरकार है। वैसे ही कंपनी जिस प्रदेश की है और केंद्र के उपक्रम के रूप में भी पक्ष और विपक्ष की स्थिति होने से खींचतान की स्थिति साफ हो रही है। खुसूर-फुसूर है कि जिस कंपनी ने भूमि खरीदने में तत्काल ही निर्णय लिया और जमकर सौदा किया था। रजिस्ट्री करवाने में भी कंपनी ने फटाफट निर्णय लिया और अपना काम चालू कर दिया था। उसके बाद निर्माण से लेकर स्थापत्य में भी जिसने तत्काल काम किया हो उसके उत्पादन में इतनी देरी का कारण समझ से परे हैं। इसे अन्यानेक कारणों से जोडकर देखा जा रहा है जिसमें से एक कारण राजनैतिक प्रतिस्पर्धा और पैंतरेबाजी भी बताया जा रहा है।

 

 

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